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व्यंकटेश आश्रम.

(वृद्धाश्रम)

एस.बी.बी.एम. सोशल फाउंडेशन संस्था दिन, दुर्बल, शोषीत, पिडित, अंध, अपंग, निराधार, आदिवासी, दलित, पिछडा वर्ग, अल्पसंख्यांक और किसान को समर्पित है। एस.बी.बी.एम. सोशल फाउंडेशन द्वारा संचालित "व्यंकटेश आश्रम" (अपनो से दूर अपना एक घर ) कुछ २.५ एकर मे फैला है। इसमें वृद्धाश्रम का बांधकाम २२००० चौ. फुट मे है। ४००० चौ. फुट का बांधकाम रहने योग्य है। नागपुर से ४५ कि. मी. दुरी पर व्यंकटेश आश्रम मु.पो. माहुली, मनसर रोड, तहसिल पाशिपनी जि. नागपुर मे स्थित है। उसी प्रकार 12 श्री और 80G अंतर्गत इन्कम टॅक्स छुट प्राप्त है।

व्यंकटेश आश्रम शांत और प्रदुषण मुक्त वातावरण मे है। व्यंकटेश आश्रम मे कुछ १२ पुरुष और १६ महिलाएं है। रहने की एवं खाने की उत्तम व्यवस्था, साफ सफाई की और विशेष ध्यान दिया जाता है। मनोरंजन के लिए टि.वी. भी उपलब्ध है।

एस.बी.बी.एम. सोशल फाउंडेशन संस्था दिनदुर्बल, शोषीत पिडित को समर्पित है तथा वृद्धाश्रम, बालसंगोपन, गौरक्षण, शिबीर, कार्यशाला, महिला सशक्तिकरण, जनजागृती, निसगोपचार, व्यसनमुक्ती, अंधश्रद्धा निर्मुलन, स्वयंरोजगार, जलसंवर्धन, वाचनालय, प्रशिक्षण केंद्र इन सभी प्रकल्पों पर कार्य कर नागरिको की सहायता करने का संकल्प है। यह एक गैरसरकारी संघटन है। जो न तो सरकार का हिस्सा है। न ही पारंपारिक लाभ का व्यवसाय यह एक गैर लाभकारी व्यवसाय है जो की बुजुर्ग, गरीब, असहाय बच्चो, गौरक्षण, पर्यावरण शिक्षण, इ. से संबंधित समस्याओ को हल करने के लिए बनाया गया एक संघटन है। देश मे आज ऐसे बहुत से गरीब और बेसहारा लोग है जो गरीबी और उत्पीडन  का शिकार है। आज के दौरा में इंसानियत खत्म होती " जा रही है। ऐसे प्रताडित लोगों के लिए एस.बी.बी.एम. कीसी फरिश्ते से कम नहीं है। जो अपने लाभ बारे मे बिना सोचे इन लोगो की मदान करते है। एस.बी.बी.एम. यह सरकार के बिना किसी दखलं के अंदाजी के समाज कल्याण के लिए अलग अलग कार्य करते है।!

कुछ वृद्धाश्रम - निश्चित ऐसे भी है जय लोग एक पूरी तरह रकम चुकाकर अपने वृद्ध माता-पिता को छोड़ आते है। पर व्यंकटेश आश्रम पुरी तरह निशुल्क है। यहा आनेवाले माता पिता  भी तरह की कोई फिस या पैसा नही लिया जाता।

आश्रम 'कि' दिनचर्या कि बात करे मो सर्वसामान्य तौर पर सभी सुबह ६-७ के बिच उठकर प्रात: विधिया, समाप्त कर योगाभ्यास करते है। - इसके बाद चाय - नाश्ता पश्चात स्नान करते है। पुजा आरती के बाद १०.३० - ११ के समय खाना खाते उसके बाद चोडी गपशप मनोरंजन के बाद 2-3 घंटे आराम तथा फिर शाम ४ बजे की चाय और रात - बजे भोजन. उसी तरह उनकी दिनचर्या वृद्धो की सेहत पर भी निर्भर करती है। की वो फिन - किन बिमारीयो और परेशानियों से गुज़र रहे है।

भोजन मे साधा खाना दाल, सब्जी, रोटी चावन रोज होता है। इसके पश्चात दान-पुण्य पर चलने वाले आश्रम मे बाहर से आनेवाले भोजन मे अलग - अलग खादय पदार्थ, दहीबड़ा रसगुल्ले, कढी, महठा नया और कोई नया पदार्थ मी खाने को मिलता है। दिनचर्या में कभी अपन किमन धूप सेंकना, इंडोर - आउटडोर गेम खेलना अपनी - व्यक्तीगत जिंदगी को एक दूसरे के साथ दारना =अपनी भुतपूर्व जिंदगी के हिस्से एक-दुसरे को सुनाना 1- सुनककर एक दूसरे का हुख-बोझ हल्का करना. गाडनिंग पहना, योगाभ्यास, सबसे हँसना, बोलना यह समावेश है।

व्यंकटेश आश्रम का मुख्य उद्देश एसे वृद्धों की सेवा करना है , जिन्हें मजबुरी में  लावारिस की तरह अपनी जिंदगी का अपने घर से बाहर गुजारनी पड़ती है। जिवन के अंतिम दौर मे वृद्धो के 7. जिवन मे खुशी प्रदान करणा . की, सोच, हैं। अपने कढ़ना से यही बेकदेश आजाद दर्द तो सभी कराह उढते है। लेकीन दुनिया मे ऐसे कम ही सोग मिलेंगे, जो दुसरो के दर्द से जाते है। और उसीकी मिसाल है हमारा देश आश्रम ह ज्यादा विचलित हो

हाला की और उनका देखाल है जिनके बच्चा वही कही। कभी हो लोग भी होते . करने वाला कोई नही होता। इसिलिए वो अपनी - मर्जी से वृद्धाश्रम मे भरती हो जाते है। - वृद्धाश्रम बनने के कई कारण है। जिसमे सबसे बड़ा कारण है हमारे जैनिक मुल्यो का अर्थ | - माहुली गाव स्थित व्यंकटेश झम्मन अपनो से सताए गए वृद्धों तथा निराधार बेसादरा हड़को के लिए किसी स्वर्ग से कम नही है। अपनो के - दर्द से तंग आकर व्यंकटेश आमम को कराने 1. 25 से अधिक कृपा अपना जिवन सापन कर रहे हैं। व्यंकटेश व्यापम करीब आठ साल से संचालित

है। यह भवन रातोरात भव्य इमारत बनकर खड़ा नही

हुआ

है

1 मुखात मे यह दो पलंग वाली झोपडी

मे चालु किया गया लेकीन बाद में इसे विस्तृत

दिया जाता रहा इसके लिए हमे काफी कठीनाईयो का सामना करना पड़ा। बड़ी विपत्तियाँ 7.हमारे सामने खडी हुई। जिसके चलते हमे व्यंकटेश आश्रम खड़ा करने के लिए सर्वस्त्र समाना पड़ा। लेकिन फिर भी मन ने हार मानने न दि। हृदधो की दयनिय अवस्था मे हमारे 1 मन को झकझोर कर रख दिया था। तभी से मन मे संकल्प था, उसी से प्रेरणा मिलती थी। 11 : आश्रम मे छुपधो की सेवा करने के लिए यहा ४ कर्मचारी है। जो उनके खाने पिने से लेकर हर तरह की सुविधा का पूरा ध्यान रखते है। दाई एकर वाले आश्रम परिसर में ही गो-शाला भी खोल रखी है। जिसमे १५ गाय है। वृद्धो की चिकित्सा के लिए गाँव मे दवाखाना है। तथा 1. नियमित डॉक्टरो की भेंट भी आगम मे होती है। व्यंकटेश आश्रम को अंतर्गत गाँव के गरीब, होशीयार बच्चो के लिए एस. बी. बी. स्टडी सर्कल का निर्माण किया गया है। जिसमे हम उन गरीब बच्चो को लायब्रेरी बनाकर पढ़ने के लिए मुफ्त मे जगह तथा साधन सामुग्री, पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही हमारे विविध उपक्रम मे एक उपक्रम जोडा गया वह है वस्त्रम् बँक, जिसमे हम विविध जगहों से पुराने - नये कपडे जमा करके उसे अच्छे से धो धोकर इस्त्री करके पॅक कर जरूरत मंदो तक पहुंचानें है। Page Ac

बृद्धाश्रम से हम जन्मदीन, बरसी, आय तथा विविध कार्यक्रम द्वारा भोजनंदान नाश्ता, कराते है - जिसके चलते आमम को योडी मदन हो जाती है।

'वृद्धावस्था जीवन का महत्त्वपूर्ण चरण
"है जब हम घर बैठकर आराम कर सकते लेकीन उसी अवस्था मे आजकल बी चाहते

बच्चे अपने माता पिता को घर पर से
है। उनसे छुटकारा पाने के लिए उन्हें वृद्धाश्रम भेजते है। हमारे के व्यवहार का एक समाज मे वृदधो को दोयम दर्जे सामना करना पडता देश 1 मे तेजी से सामाजिक परिवर्तनोका दौर चालु है

1. इस कारण से हृदय की समस्याए तेजी से विकराल रूप धारण कर रही है। नैतिक मुल्या 1- का. अद्यपतन होते जा रहा है।
वृद्धाश्रम कोई प्रकृती की देन 1. नदी है। यह अपने ही परिवार के सदस्यो द्वारा तिरस्कृत कृत्वो का समाज है एक ऐसे संघटन संस्थान व्यंकटेश आमन की नीव का विचार हमारे लिए वाकई प्रेरणादायी है। जिसे हमने 8 साल पहले एक पौधे के रूप, मे बलगाया आज यह एक बडे पेड के रूप मे उग आया है।